प्रेस विज्ञप्ति (दिनांक 11.08.2026)
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झारखण्ड चैम्बर के कंज्यूमर ड्यूरेबल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स उप समिति की बैठक में डिजिटल भुगतान शुल्क को लेकर चिंता, एमडीआर समाप्त करने की मांग
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झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स के कंज्यूमर ड्यूरेबल एंड इलेक्ट्रॉनिक उप समिति की बैठक आज चैम्बर भवन में हुई। बैठक में उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कंज्यूमर ड्यूरेबल्स क्षेत्र से जुड़े व्यापारियों की वर्तमान समस्याओं, घटते मार्जिन, ऑनलाइन व्यापार से बढ़ती प्रतिस्पर्धा तथा डिजिटल भुगतान पर लगने वाले शुल्क को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में सदस्यों ने कहा कि छोटे एवं मध्यम दुकानदार पहले से ही ऑनलाइन बाजार की बढ़ती प्रतिस्पर्धा से दबाव में हैं। बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के कारण व्यापारियों के मार्जिन में लगातार कमी आई है। ऐसे में डिजिटल भुगतान एवं कार्ड ट्रांजैक्शन से जुड़े अतिरिक्त शुल्क छोटे व्यापारियों के लिए एक और आर्थिक बोझ बन रहे हैं। चैम्बर उपाध्यक्ष प्रवीण लोहिया ने कहा कि जब किसी छोटे दुकानदार को प्रत्येक डिजिटल/कार्ड भुगतान पर शुल्क वहन करना पड़ता है, तो कम मार्जिन वाले व्यापार में इसका सीधा असर उसकी आय पर पड़ता है। इसलिए सरकार एवं संबंधित वित्तीय संस्थानों से आग्रह किया गया कि छोटे व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए एमडीआर अथवा अन्य भुगतान संबंधी शुल्क को समाप्त अथवा न्यूनतम किया जाए, ताकि डिजिटल भुगतान को अपनाने वाले व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
बैठक में यूपीआई को लेकर भी चर्चा हुई। उपाध्यक्ष राम बांगड़ ने कहा कि यूपीआई देश में डिजिटल एवं कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। छोटे-बड़े व्यापारी और आम उपभोक्ता तेजी से यूपीआई का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में यूपीआई को किसी भी प्रकार के अतिरिक्त शुल्क से मुक्त रखना आवश्यक है। व्यापारियों ने कहा कि यदि डिजिटल भुगतान पर किसी भी रूप में अतिरिक्त लागत बढ़ती है, तो इससे छोटे व्यापारियों के लिए डिजिटल भुगतान स्वीकार करना कठिन हो सकता है और उपभोक्ताओं में भी इसके प्रति हतोत्साहन पैदा होने की आशंका रहेगी।
चैम्बर द्वारा केंद्र सरकार से आग्रह किया गया कि कैशलेस इंडिया एवं डिजिटल इंडिया की भावना को मजबूत करने के लिए यूपीआई को सरल, सुरक्षित और न्यूनतम लागत वाला भुगतान माध्यम बनाए रखा जाए। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार द्वारा अब तक किए गए प्रयासों को देखते हुए यह आवश्यक है कि व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ न डाला जाए। यह भी कहा गया कि छोटे व्यापारियों के लिए डिजिटल भुगतान की लागत को कम करना केवल व्यापारियों के हित में ही नहीं, बल्कि देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम होगा। सदस्यों ने सरकार से मांग की कि छोटे एवं मध्यम व्यापारियों की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए डिजिटल भुगतान से जुड़े शुल्क की समीक्षा की जाए तथा व्यापारियों पर पड़ रहे अतिरिक्त वित्तीय बोझ को समाप्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
बैठक में चैम्बर उपाध्यक्ष प्रवीण लोहिया एवं राम बांगड़, सह सचिव रोहित पोद्दार, उप समिति चेयरमैन श्रीकृष्ण अग्रवाल, सदस्य अंकुर जैन, प्रकाश कमालिया आदि उपस्थित थे।
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रोहित अग्रवाल
महासचिव
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