प्रेस विज्ञप्ति (06/08/2026)
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर चैम्बर भवन में कार्यशाला, तसर सिल्क एवं स्थानीय हस्तशिल्प को वैश्विक पहचान दिलाने पर जोर
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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की पूर्व संध्या पर फेडरेशन झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज़ की महिला उद्यमिता उप समिति द्वारा आज चैम्बर भवन में कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य भारतीय हथकरघा, पारंपरिक कला एवं आधुनिक डिज़ाइन को एक मंच पर लाकर नये व्यवसायिक अवसरों का सृजन करना, महिला उद्यमिता को बढ़ावा देना तथा स्थानीय कारीगरों को सशक्त बनाना था।
चैम्बर महासचिव रोहित अग्रवाल ने कहा कि झारखंड की पारंपरिक कला एवं हैंडलूम इंडस्ट्री में अपार संभावनाएँ हैं। आवश्यकता इस बात की है कि स्थानीय कारीगरों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, ब्रांडिंग तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाए। झारखण्ड चैम्बर इस दिशा में उद्योग, डिज़ाइन एक्सपर्ट एवं कारीगरों के बीच समन्वय स्थापित कर नये व्यवसायिक अवसर सृजित करने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। आनेवाले दिनों में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।
उप समिति की चेयरपर्सन आस्था किरण ने कहा कि भारतीय हथकरघा केवल वस्त्र निर्माण की परंपरा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्त आधार है। झारखंड के प्रसिद्ध तसर सिल्क को आधुनिक डिज़ाइन, फैशन, ब्रांडिंग एवं डिजिटल मार्केटिंग के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में नई पहचान दिलाई जा सकती है। ऐसे प्रशिक्षण एवं कार्यशालाएँ कलाकारों और महिला उद्यमियों को सीधे बाज़ार एवं रोजगार से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं।
कार्यशाला के दौरान कलाकारों ने अपनी विशिष्ट पारंपरिक एवं लोक कलाओं का आकर्षक प्रदर्शन किया। श्रेयोशी पॉल ने पिछवाई कला, नवनीता पॉल ने लोक कला, मैना सिंह सरदार ने सोहराई कला, सपना कुमारी ने लोक कला, ईशा वर्मा ने बंगाल पट्ट चित्र, सोनाली दीप्ति ने एब्स्ट्रैक्ट कला तथा सरिता गुप्ता ने सोहराई कला की उत्कृष्ट प्रस्तुति देकर भारतीय हस्तकला एवं सांस्कृतिक विरासत की समृद्ध परंपरा को प्रदर्शित किया। जोहार कला की संस्थापक सदस्य सोहिनी ने कहा कि वर्तमान समय में वैश्विक स्तर पर हस्तनिर्मित एवं पर्यावरण अनुकूल उत्पादों की बढ़ती मांग झारखंड के कलाकारों के लिए नए अवसर लेकर आई है।
टेफी की सदस्या अर्चना श्रीवास्तव ने कहा कि पारंपरिक कला को आधुनिक डिज़ाइन, गुणवत्तापूर्ण उत्पाद विकास एवं डिजिटल विपणन से जोड़कर महिला उद्यमियों तथा ग्रामीण शिल्पकारों के लिए आत्मनिर्भरता के नए द्वार खोले जा सकते हैं। कार्यशाला का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि भारतीय हथकरघा, पारंपरिक कला एवं स्थानीय शिल्प को डिज़ाइन, नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से सशक्त बनाते हुए रोजगार सृजन, महिला सशक्तिकरण एवं आर्थिक विकास को नई गति प्रदान की जाएगी तथा झारखंड के हस्तनिर्मित उत्पादों को वैश्विक मंच तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।
कार्यशाला में चैम्बर के महासचिव रोहित अग्रवाल, उप समिति चेयरपर्सन आस्था किरण, सदस्य किशन अग्रवाल, सदस्य सोहिनी, अर्चना श्रीवास्तव आदि कई सदस्य एवं कलाकार उपस्थित थे।
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रोहित अग्रवाल
महासचिव
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