प्रेस विज्ञप्ति (दिनांक :09/05/2026)
होटल इंडस्ट्रीज पर प्रभावी सिटी टूरिस्ट टैक्स पर पुनर्विचार आवश्यक - चैंबर
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राज्य में होटल इंडस्ट्री पर हाल ही में प्रभावी किये गये सिटी टूरिस्ट टैक्स पर पुनर्विचार हेतु फेडरेशन ऑफ झारखण्ड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज द्वारा वित्त मंत्री श्री राधाकृष्ण किशोर को पत्राचार किया गया। विदित हो कि झारखण्ड मंत्रिमंडल द्वारा झारखण्ड सिटी टूरिस्ट टैक्स रूल्स 2025 को मंजूरी (जिसमें पर्यटकों के होटल में ठहरने पर एक नया कर लगाने का प्रस्ताव) दी गई है। प्रस्ताव के अनुसार घरेलू पर्यटकों को जीएसटी दरों के आधार पर कुल बिल पर 2.5% तक जबकि विदेशी पर्यटकों को अधिक कर देना होगा, जो संभवतः 4.1% तक होगा। नये करारोपण से होनेवाली समस्या पर आज चैंबर भवन में होटल संचालकों की भी एक बैठक हुई जिसमें होटल संचालकों ने झारखण्ड चैंबर से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की।
चैंबर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने कहा कि वर्तमान में होटल इंडस्ट्री पर जीएसटी पहले से ही 5 से 18 प्रतिशत तक प्रभावी है। जीएसटी व्यवस्था लागू करते समय वन नेशन, वन टैक्स का सिद्धांत अपनाया गया था, जिस अंतर्गत यह स्पष्ट किया गया है कि जिन सेवाओं या उत्पादों पर जीएसटी लागू है, उन पर राज्य सरकार द्वारा किसी भी प्रकार का अतिरिक्त कर नहीं लगाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में होटल इंडस्ट्री पर प्रस्तावित टूरिस्ट टैक्स न केवल जीएसटी के मूल सिद्धांतों के विपरीत है बल्कि यह व्यापारियों एवं उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी डालेगा। चैंबर के सह सचिव नवजोत अलंग ने कहा कि यह टैक्स पर्यटकों पर अतिरिक्त करारोपण का भार है तथा इससे राज्य के पर्यटन उद्योग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की भी आशंका है। यह आग्रह किया गया कि राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित टूरिस्ट टैक्स पर पुनर्विचार करते हुए इसे वापस लिया जाय ताकि राज्य सरकार की परिकल्पना के अनुरूप प्रदेश में व्यापार एवं पर्यटन उद्योग को प्रोत्साहन मिल सके और जीएसटी के प्रावधानों का भी पालन सुनिश्चित हो सके।
बैठक में चैंबर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा, उपाध्यक्ष प्रवीण लोहिया, राम बांगड़, महासचिव रोहित अग्रवाल, सह सचिव नवजोत अलंग, रोहित पोद्दार, कोषाध्यक्ष अनिल अग्रवाल एवं कई होटल संचालक उपस्थित थे।
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रोहित अग्रवाल
महासचिव
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