Press Release

FJCCI and BAI Hold Joint Press Meet Over Soaring Bitumen Costs; Seek Local Depot Setup.

  • 26Mar-2026

    प्रेस वार्ता
    बिटुमिन की कमी व कीमतों में भारी वृद्धि से निर्माण कार्य प्रभावित, राज्य में डिपो स्थापित करने की मांग
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    फेडरेशन ऑफ झारखण्ड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज एवं बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, झारखण्ड चैप्टर द्वारा आज चैंबर भवन में संयुक्त रूप से प्रेस वार्ता आयोजित की गई। चैंबर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने कहा कि खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध की अनिश्चितताओं एवं रॉ मटीरियल की अनुपलब्धता के कारण कंस्ट्रक्शन सेक्टर गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। उन्होंने बताया कि बिटुमिन की दर 40 हजार रु० प्रति टन से बढ़कर 54 हजार रु० प्रति टन हो गई है।  इससे कार्यादेश ले चुके संवेदकों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। झारखण्ड में केवल बोकारो में ही कंटेनर डिपो होने और वहां भी पर्याप्त उपलब्धता नहीं रहने के कारण बिटुमिन हल्दिया से मंगाना पड़ रहा है। उन्होंने राज्य में और कंटेनर डिपो खोलने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि कॉमर्शियल डीजल की कीमत में 22 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि से लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ गई है, जिसका असर अन्य संबंधित क्षेत्रों पर भी पड़ रहा है। बिटुमिन की कमी के कारण सड़क निर्माण कार्य लगभग 50 प्रतिशत तक सीमित हो गया है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि जिस प्रकार देश में क्रूड ऑयल का 90 दिनों का भंडारण रखा जाता है, उसी प्रकार राज्य स्तर पर भी रिजर्व व्यवस्था विकसित की जाए।

    बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, झारखण्ड चैप्टर के चेयरमैन रविराज अग्रवाल ने बताया कि पिछले तीन महीनों से झारखण्ड के संवेदकों को बोकारो स्थित आईओसीएल/बीपीसीएल/एचपीसीएल डिपो से बिटुमिन उपलब्ध नहीं हो रहा है, वहीं हल्दिया से भी आपूर्ति बाधित है। इसके कारण सड़क निर्माण कार्य पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। हर वर्ष फरवरी-मार्च में कार्य के समय ही बिटुमिन की कृत्रिम कमी उत्पन्न हो जाती है। पिछले तीन महीनों में बिटुमिन की कीमत में लगभग 15,000 रुपये प्रति टन की वृद्धि हुई है, जिससे संवेदकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। साथ ही इलेक्ट्रिकल गुड्स एवं वायर के दाम भी लगभग डेढ़ गुना बढ़ गए हैं। उन्होंने मांग की कि मूल्य वृद्धि का भार सरकार वहन करे तथा झारखण्ड में ऑयल कंपनियों (आईओसीएल/बीपीसीएल/एचपीसीएल) का बल्क बिटुमिन डिपो स्थापित किया जाए, ताकि राज्य की निर्भरता हल्दिया पर समाप्त हो और एसजीएसटी में होने वाला नुकसान रुके। उन्होंने यह भी मांग की कि बिटुमिन की कीमतों में अनावश्यक वृद्धि पर रोक लगाई जाए तथा निजी कंपनियों को भी बिटुमिन आपूर्ति की अनुमति दी जाए, जैसा कि एनएचएआई/राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में किया जाता है।

    बिल्डर्स एसोसिएशन की ओर से अशोक प्रधान ने कहा कि फरवरी माह से बिटुमिन की दरों में 30-35 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। झारखण्ड में एक भी बल्क बिटुमिन डिपो नहीं होने के कारण भुगतान के बावजूद सामग्री उपलब्ध नहीं हो पा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि झारखण्ड गठन के 26 वर्ष बाद भी राज्य में एक भी रिफाइनरी नहीं है। हल्दिया की तर्ज पर रांची में भी टर्मिनल डिपो स्थापित किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि रिलायंस की उच्च गुणवत्ता वाली रिफाइनरी के उत्पाद झारखण्ड में अनुमोदित नहीं हैं, जिससे विकल्प सीमित हो जाते हैं। ग्रामीण विकास कार्यों में लगे छोटे संवेदक, जो 5-7 प्रतिशत मार्जिन पर कार्य करते हैं, इस स्थिति में गंभीर आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं।
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    रोहित अग्रवाल
    महासचिव
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