प्रेस विज्ञप्ति (दिनांक :28/01/2026)
ग्रामीण एवं आदिवासी आजीविका सशक्तिकरण विषयक राष्ट्रीय कार्यशाला
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चैम्बर अध्यक्ष ने राज्य में महुआ बोर्ड की स्थापना और वन संरक्षण के एवज में झारखण्ड को विशेष केंद्रीय फंड देने की अपील की
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नीति आयोग, भारत सरकार के सहयोग से ग्रामीण विकास विभाग, झारखण्ड सरकार एवं झारखण्ड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसायटी द्वारा आज आयोजित सतत उद्यम विकास के माध्यम से ग्रामीण एवं आदिवासी आजीविका सशक्तिकरण विषयक राष्ट्रीय कार्यशाला में फेडरेशन ऑफ झारखण्ड चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा मुख्य रूप से शामिल हुए। कार्यशाला में नीति-निर्माताओं, वरिष्ठ अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों एवं विभिन्न भागीदार संस्थाओं के साथ व्यापक संवाद हुआ, जिसका उद्देश्य आदिवासी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यम आधारित विकास को गति देना तथा कौशल, वित्त और बाजार तक पहुंच से जुड़ी चुनौतियों का समाधान तलाशना रहा।
चैम्बर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने कहा कि झारखण्ड में ग्रामीण और आदिवासी आजीविका को सिर्फ गुजर-बसर की सोच से निकालकर सतत उद्यम की दिशा में ले जाना समय की मांग है। उन्होंने बताया कि राज्य की लगभग 26 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जनजाति से आती है और करीब 78 प्रतिशत लोग ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करते हैं, ऐसे में विकास की रणनीति का आधार समुदाय की भागीदारी और स्थानीय संसाधनों का सतत उपयोग होना चाहिए। चैम्बर अध्यक्ष ने झारखण्ड में महुआ बोर्ड की स्थापना की मांग की। यह भी कहा कि झारखण्ड देश के लिए जंगल और पर्यावरण संरक्षण में बड़ी भूमिका निभा रहा है। वनों की रक्षा के कारण राज्य अपने कई संसाधनों का उपयोग नहीं कर पा रहा, इसलिए इसके एवज में केंद्र सरकार द्वारा झारखण्ड को विशेष केंद्रीय फंड उपलब्ध कराया जाना न्यायसंगत होगा।
उन्होंने ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने, स्वयं सहायता समूहों को एफपीओ एवं महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों में परिवर्तित करने, माइनर फॉरेस्ट प्रोड्यूस के मूल्य संवर्धन, ब्लॉक स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना तथा जामकोफेड जैसे मॉडलों के विस्तार पर बल दिया। साथ ही वाड़ी मॉडल, जल संरक्षण, जलवायु-स्मार्ट कृषि, डिजिटल मार्केट लिंकज, ई-मार्केटप्लेस से जोड़ने, ब्रांडिंग, कौशल विकास, स्टार्टअप हब, गैर-कृषि रोजगार, तथा कोयला-आधारित अर्थव्यवस्था से जस्ट ट्रांजिशन की दिशा में ग्रामीण उद्यमों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने यह भी कहा कि मनरेगा, डीएमएफ फंड, सीएसआर और विभिन्न सरकारी योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय से ही टिकाऊ परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
चैम्बर अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि राज्य में उद्यम, निवेश और रोजगार सृजन के लिए वह सरकार एवं नीति आयोग के साथ निरंतर सहयोग हेतु प्रतिबद्ध है और ऐसे प्रयासों से झारखण्ड को एक मजबूत ग्रामीण-आदिवासी उद्यम आधारित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर किया जा सकता है।
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रोहित अग्रवाल
महासचिव
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