Press Release

Landmark Verdict on Electricity Duty Act: Massive Relief for Consumers and Industry.

  • 06Jan-2026

    प्रेस विज्ञप्ति (दिनांक: 06/01/2026)
    विद्युत शुल्क अधिनियम पर ऐतिहासिक फैसला – उपभोक्ताओं एवं उद्योग जगत को बड़ी राहत
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    माननीय झारखण्ड उच्च न्यायालय ने विद्युत शुल्क अधिनियम से संबंधित एक ऐतिहासिक निर्णय में वर्ष 2021 में लाए गए संशोधन अधिनियम एवं उससे संबंधित नियमों को निरस्त कर दिया है। इस संशोधन के तहत विद्युत शुल्क को नेट चार्जेस के आधार पर वसूलने की व्यवस्था की गई थी, जिसे माननीय न्यायालय ने असंवैधानिक ठहराया है। माननीय न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि विद्युत शुल्क केवल यूनिट (बिजली खपत) के आधार पर ही लगाया जा सकता है, किसी अन्य शुल्क या नेट चार्जेस के आधार पर नहीं। इस निर्णय के परिणामस्वरूप वर्ष 2021 के संशोधन के तहत की गई विद्युत शुल्क वसूली को अवैध माना गया है। इस फैसले से राज्य के उद्योग, व्यापार एवं आम बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी तथा अवैध रूप से वसूले गए विद्युत शुल्क के संबंध में रिफंड का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

    झारखण्ड चैम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने माननीय झारखण्ड उच्च न्यायालय के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह फैसला राज्य के उद्योग एवं व्यापार जगत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विद्युत शुल्क की गलत व्याख्या के कारण उद्योगों की लागत अनावश्यक रूप से बढ़ रही थी, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो रही थी। न्यायालय के इस निर्णय से उद्योगों को आर्थिक राहत के साथ-साथ भविष्य के लिए स्पष्टता भी प्राप्त होगी।

    चैम्बर के महासचिव रोहित अग्रवाल ने कहा कि झारखण्ड चैम्बर सदैव उद्योग एवं उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहा है और आगे भी सरकार के साथ सकारात्मक संवाद के माध्यम से व्यावहारिक एवं न्यायसंगत नीतियों के लिए प्रयास करता रहेगा। 

    न्यायालय के निर्णय की जानकारी देते हुए चैम्बर की लीगल अफेयर्स उप-समिति के चेयरमैन देवेश अजमानी ने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय का यह निर्णय न्याय, पारदर्शिता एवं कानून के शासन की जीत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्ष 2021 के संशोधन के कारण उपभोक्ताओं और उद्योगों पर अवैधानिक वित्तीय बोझ डाला जा रहा था, जिसे न्यायालय ने समाप्त कर दिया है। 

    झारखण्ड चैम्बर इस मुद्दे को प्रारंभ से ही गंभीरता से उठाता रहा है और उद्योग जगत की समस्याओं को उचित मंचों पर रखा गया। यह फैसला स्पष्ट संदेश देता है कि किसी भी प्रकार का कर या शुल्क केवल वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप ही लगाया जा सकता है। चैम्बर ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि माननीय न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए शीघ्र ही रिफंड की प्रक्रिया एवं भविष्य की स्पष्ट व्यवस्था की घोषणा की जाए, ताकि उद्योग, व्यापार एवं आम बिजली उपभोक्ताओं को शीघ्र एवं प्रभावी राहत मिल सके।
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    रोहित अग्रवाल 
    महासचिव 
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